बीकानेर: न ओटीपी मांगा, न फोन पर आया कोई अलर्ट, फिर भी खाते से 2,81,600 पार
बीकानेर: न ओटीपी मांगा, न फोन पर आया कोई अलर्ट, फिर भी खाते से 2,81,600 पार
बीकानेर। साइबर अपराधियों ने डिजिटल ठगी का ऐसा शातिर तरीका अपनाया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था और बैंक अलर्ट सिस्टम दोनों को चकमा दे दिया। शहर के जय नारायण व्यास कॉलोनी थाना क्षेत्र में बिना किसी ओटीपी साझा किए और बिना बैंक का कोई अलर्ट मैसेज आए खाते से 2,81,600 की ऑनलाइन ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पीड़ित की रिपोर्ट पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
खतूरिया कॉलोनी निवासी अरविंद सिंह का आईसीआईसीआई बैंक में खाता है। साइबर ठगों ने फ्रॉड को अंजाम देने के लिए बेहद सुनियोजित तरीका अपनाया। एकमुश्त बड़ी रकम निकालने के बजाय तीन दिनों में अलग-अलग ट्रांजेक्शन किए ताकि बैंक के सिक्योरिटी रडार से बचा जा सके। 20 सितंबर को दोपहर 2:05 बजे पहली बार में 90,000 यस बैंक से जुड़ी एक यूपीआई आईडी (सुभाजीत) पर ट्रांसफर किए गए। अगले दिन 21 सितंबर को शाम 4:09 बजे इंडसइंड बैंक से जुड़ी यूपीआई आईडी (राकेश) पर 95,800 भेजे गए और 22 सितंबर की शाम 4:43 बजे सेंट्रल बैंक से जुड़ी यूपीआई आईडी (मनीष) पर फिर 95,800 उड़ा लिए गए। इस दौरान अरविन्दसिंह के मोबाइल पर न तो कोई ओटीपी आया और न ही बैंक की ओर से पैसे कटने का कोई नोटिफिकेशन या एसएमएस अलर्ट मिला।
साइबर ठगों ने बैकएंड पर अनधिकृत यूपीआई मैपिंग या डिवाइस क्लोनिंग के जरिए खाते का सीधा एक्सेस हासिल किया था, जिससे पीड़ित को खाते से पैसे कटने की भनक तब लगी जब उसने स्वयं अपना बैलेंस चेक किया। रुपए ट्रांसफर हुए खातों को खंगाल रही पुलिस रकम कटने का पता चलते ही पीड़ित ने सबसे पहले आईसीआईसीआई बैंक के कस्टमर केयर पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई गई। राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर, जयपुर से जीरो नंबरी एफआईआर मिलने के बाद जेएनवीसी थाना पुलिस ने विधिवत मामला दर्ज किया।
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