अस्पतालों में बढ़ती हिंसा पर चिकित्सकों की चिंता, डॉ. बी. एल. स्वामी बोले -"संवाद ही सबसे बड़ी सुरक्षा"
अस्पतालों में बढ़ती हिंसा पर चिकित्सकों की चिंता, डॉ. बी. एल. स्वामी बोले -"संवाद ही सबसे बड़ी सुरक्षा"
उपचार के राज्यस्तरीय कार्यक्रम 'मंथन' में प्रदेशभर के 250 से अधिक वरिष्ठ चिकित्सक जुटे, 'कोड वॉयलेट' बुकलेट का अनावरण
जयपुर/बीकानेर। निजी चिकित्सालयों के संगठन 'उपचार' द्वारा जयपुर के होटल गोल्डन ट्यूलिप में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम 'मंथन' में आयुष्मान हार्ट केयर सेंटर, बीकानेर के वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट एवं उपचार राजस्थान के संयुक्त सचिव डॉ. बी.एल. स्वामी ने "हेल्थकेयर में बढ़ती हिंसा: कैसे करें प्रभावी रिस्पॉन्स" विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने चिकित्सा संस्थानों में लगातार बढ़ रही हिंसा की घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए इसकी रोकथाम और घटना के समय सही प्रतिक्रिया, दोनों पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. स्वामी ने कहा, "अस्पताल में हिंसा अचानक नहीं होती, यह अधूरे संवाद और टूटे भरोसे का परिणाम होती है। यदि मरीज के परिजनों को समय-समय पर उसकी गंभीर स्थिति की सच्ची और सरल भाषा में जानकारी दी जाए, तो अधिकांश विवाद वहीं समाप्त हो जाते हैं।" उन्होंने सुझाव दिया कि गंभीर मरीजों के परिजनों से दिन में निश्चित समय पर वरिष्ठ चिकित्सक स्वयं बात करें, इलाज की हर प्रक्रिया की सहमति स्थानीय भाषा में ली जाए तथा संपूर्ण उपचार का उचित डॉक्युमेंटेशन रखा जाए।
अपने प्रस्तुतीकरण में डॉ. स्वामी ने कहा कि हर अस्पताल में स्टाफ एवं सुरक्षा गार्डों का नियमित प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए, ताकि तनावपूर्ण स्थिति को शुरुआत में ही शांत किया जा सके। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी और आईसीयू जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी, परिजनों के लिए अलग प्रतीक्षा एवं काउंसलिंग स्थान तथा किसी भी अप्रिय स्थिति में तुरंत सक्रिय होने वाली 'रिस्पॉन्स टीम' होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हिंसा की स्थिति में सबसे पहले स्टाफ की सुरक्षा, फिर मरीज का इलाज जारी रखना और तुरंत पुलिस को सूचना देकर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। चिकित्सक सुरक्षित रहेंगे, तभी मरीज सुरक्षित रहेंगे।"
डॉ. स्वामी ने समाज से भावुक अपील करते हुए कहा, "मरीज के परिजनों को भी चिकित्सकों पर भरोसा बनाए रखने की आवश्यकता है। कोई भी डॉक्टर कभी अपने मरीज का नुकसान नहीं चाहता मरीज के नुकसान में डॉक्टर का कभी कोई लाभ नहीं होता। हर डॉक्टर की पहली और आखिरी कोशिश मरीज की जान बचाना ही होती है। कई बार बीमारी गंभीर होती है और परिणाम हमारी इच्छा के अनुरूप नहीं आते, ऐसे समय में परिजनों को धैर्य रखना होगा।" उन्होंने कहा कि अस्पताल में की गई हिंसा का नुकसान केवल एक डॉक्टर को नहीं, बल्कि वहां भर्ती हर मरीज को होता है, क्योंकि ऐसे माहौल में पूरी चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित होती है। उन्होंने कहा, "यदि आप चाहते हैं कि डॉक्टर आपके परिजन का पूरे मन से इलाज करे, तो उसे सम्मान और भयमुक्त वातावरण देना होगा, ताकि वह बिना किसी डर के सर्वश्रेष्ठ उपचार कर सके।"
संगोष्ठी में उपचार अध्यक्ष डॉ. बाज़िया, डॉ. राजशेखर यादव, डॉ. कांतेश खेतानी, पूर्व आईएमए अध्यक्ष डॉ. रजनीश शर्मा, वर्तमान आईएमए अध्यक्ष डॉ. एन. के. अग्रवाल, गंगानगर से डॉ. मुंजाल, डॉ. विवेक, डॉ. देवेन्द्र सहित उपचार के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में चिकित्सकों के विरुद्ध हिंसा के साथ-साथ सरकारी योजनाओं के असंगत पैकेज, अस्पतालों पर बढ़ते अव्यावहारिक नियमों के बोझ तथा आरजीएचएस (RGHS) के भुगतान में हो रही देरी पर भी गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं
ने कहा कि असंगत पैकेज दरों के कारण मरीजों को मिलने वाले उपचार में भेदभाव की स्थिति बन रही है, जिसका सीधा असर आमजन पर पड़ता है। इन सभी विषयों पर आगामी रणनीति तैयार की गई तथा निर्णय लिया गया कि शीघ्र ही एक प्रतिनिधिमंडल राज्य सरकार को इन समस्याओं से अवगत कराएगा।
इस अवसर पर उपचार की टीम द्वारा 'कोड वॉयलेट' बुकलेट का अनावरण भी किया गया। इस बुकलेट में अस्पताल में हिंसा की स्थिति में स्टाफ को क्या करना चाहिए, किस प्रकार स्वयं और मरीजों को सुरक्षित रखना है तथा घटना के बाद की प्रक्रिया क्या हो, इसकी चरणबद्ध जानकारी दी गई है, ताकि किसी भी स्वास्थ्यकर्मी को कोई नुकसान न पहुंचे।
Join for Latest News
हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ