बीकानेर पर मंडराया पेयजल संकट, जाने क्या है वजह
बीकानेर। राजस्थान में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के ठेकेदारों और सरकार के बीच चल रहा गतिरोध अब प्रदेश के साथ-साथ सीमावर्ती जिले बीकानेर के लिए भी बड़ी मुसीबत बनने जा रहा है। राजस्थान कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन संघर्ष समिति के आह्वान पर 17 जून से प्रदेशव्यापी हड़ताल और पानी की सप्लाई ठप करने की चेतावनी ने जलदाय विभाग के अधिकारियों की रातों की नींद उड़ा दी है। यदि यह हड़ताल परवान चढ़ती है और ठेकेदारों ने सप्लाई बंद की तो बीकानेर के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर तक हाहाकार मचना तय है।
बीकानेर में इस हड़ताल का सबसे सीधा और घातक असर बज्जू और लूणकरणसर क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है, जहां के करीब 30 से 35 गांवों में पानी की बूंद-बूंद के लिए त्राहि-त्राहि मच सकती है। भीषण गर्मी के इस दौर में इन गांवों में नहरों और नलकूपों के भरोसे रहने वाली आबादी के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कीमों के तहत चलने वाले नलकूपों और डिग्गियों के संचालन का जिम्मा ठेका कर्मियों और ठेकेदारों के पास ही है। ऐसे में उनके काम रोकने से इन 35 गांवों में वैकल्पिक व्यवस्था करना प्रशासन के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। हालांकि, जलदाय विभाग इस बात को लेकर भी निश्चिंत हैं कि हड़ताल नहीं होगी और सरकार कोई ना कोई हल जरूर निकाल लेगी।
बीछवाल को लेकर राहत, पर शोभासर ने बढ़ाई पीएचईडी की चिंता
इस पूरे आंदोलन के बीच जलदाय विभाग प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बीकानेर शहर की प्यास बुझाना है। बीकानेर शहर को पानी सप्लाई करने वाले दो प्रमुख केंद्र हैं। बीछवाल और शोभासर। इन दोनों केंद्रों के ठेकेदार अलग-अलग हैं, लेकिन एसोसिएशन के दबाव और एकजुटता के चलते इनके भी हड़ताल में शामिल होने की पूरी संभावना बनी हुई है। बीछवाल फिल्टर प्लांट को लेकर पीएचईडी प्रशासन ज्यादा चिंतित नजर नहीं आ रहा है। अधिकारियों का मानना है कि बीछवाल में स्थितियां नियंत्रण में हैं और वहां स्थानीय स्तर पर तालमेल बिठाकर सप्लाई सुचारू रखी जा सकती है। मगर शोभासर फिल्टर प्लांट प्रशासन के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। शोभासर प्लांट से बीकानेर शहर के एक बहुत बड़े हिस्से में पेयजल की आपूर्ति होती है। यदि शोभासर के ठेकेदार और उनके तकनीकी कर्मचारी चाबियां सौंपकर हड़ताल पर चले जाते हैं तो शहर की आधी से ज्यादा आबादी के हलक सूख जाएंगे। यही कारण है कि पीएचईडी के आला अधिकारी शोभासर प्लांट को लेकर खासे चिंतित हैं और पल-पल की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
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