बीकानेर में सफाई व्यवस्था पर सियासी टकराव, कांग्रेस पार्षदों ने 70 से ज्यादा कचरा वाहन रोके, डिप्टी मेयर के आश्वासन पर घेराव समाप्त
बीकानेर में सफाई व्यवस्था पर सियासी टकराव, कांग्रेस पार्षदों ने 70 से ज्यादा कचरा वाहन रोके, डिप्टी मेयर के आश्वासन पर घेराव समाप्त
बीकानेर। नगर निगम चुनाव खत्म होने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ता राजनीतिक टकराव अब शहर की सफाई व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। मंगलवार सुबह कांग्रेस पार्षदों ने बल्लभगार्डन के पास स्थित कचरा संग्रहण केंद्र से निकलने वाले कचरा वाहनों को रोक दिया। इसके चलते शहर में कचरा उठाने का काम प्रभावित हुआ। कांग्रेस पार्षद सुबह कचरा संग्रहण केंद्र पहुंचे और वहां से निकल रहे वाहनों को रोककर अपने साथ कलेक्टरी ले गए। कलेक्टर कार्यालय के बाहर 70 से ज्यादा कचरा वाहन खड़े कर विरोध प्रदर्शन किया गया। पार्षदों का आरोप है कि निजी फर्म को टेंडर की निर्धारित शर्तें पूरी किए बिना ही काम शुरू करने की अनुमति दी गई है।
विरोध की सूचना मिलने पर डिप्टी मेयर पंकज गहलोत और भाजपा पार्षद भगवान सिंह मेड़तिया भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कांग्रेस पार्षदों से बातचीत कर समझाइश की।
डिप्टी मेयर ने कहा कि पहले पूरे शहर की सफाई करवाई जाए, इसके बाद नगर निगम आयुक्त, जमादार और निजी फर्म के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर पूरे मामले पर चर्चा की जाएगी। आश्वासन के बाद कांग्रेस पार्षदों ने कचरा वाहनों को रवाना होने दिया। इसके बाद वाहन शहर में कचरा उठाने के लिए निकल गए।
कांग्रेस पार्षदों का आरोप—मंजूर वाहनों की संख्या पूरी नहीं
कांग्रेस पार्षदों का आरोप है कि पिछले दिनों जितने वाहनों को मंजूरी दी गई थी, उतने वाहन मौके पर उपलब्ध नहीं हैं। उनका कहना है कि कुछ चुनिंदा मोहल्लों में ही कचरा संग्रहण के लिए वाहन भेजे जा रहे हैं, जबकि शहर के अधिकांश हिस्सों में कचरा जमा है। विरोध प्रदर्शन में पार्षद जावेद पड़िहार, नवरतन डागा, राहुल जादुसंगत, नंदलाल जावा, पवन कुमार, सुभाष स्वामी और पूर्व पार्षद आदर्श शर्मा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
वहीं दूसरी ओर भाजपा पार्षद अपने-अपने क्षेत्रों में कचरा उठाने वाले वाहनों को बुलाने में जुटे हैं। दोनों दलों के बीच सफाई व्यवस्था को लेकर जारी विवाद का सीधा असर शहर में कचरा संग्रहण व्यवस्था पर पड़ रहा है।
बीकानेर शहर में 2 अक्टूबर से एक निजी फर्म को कचरा उठाने का काम सौंपा गया है। जानकारी के अनुसार फर्म को करीब 200 वाहनों के साथ काम करना था, लेकिन अभी लगभग 70 वाहन ही उपलब्ध कराए गए हैं। नगर निगम मेयर अनिल कल्ला ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि निजी फर्म टेंडर की करीब 20 प्रतिशत शर्तें ही पूरी कर रही है, जबकि 80 प्रतिशत शर्तें अभी अधूरी हैं। मेयर का कहना है कि ऐसी स्थिति में नगर निगम क्षेत्र में दोबारा टेंडर किया जाना चाहिए।
वहीं भाजपा पार्षद और डिप्टी मेयर पंकज गहलोत का पक्ष है कि सफाई का काम शुरू होना चाहिए। मेयर का चुनाव लड़ चुके सुरेंद्र सिंह शेखावत ने भी कहा है कि मेयर शहर के सफाई अभियान को रोक नहीं सकते। फिलहाल दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं और सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निगम में राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है।
Join for Latest News
हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ