बीकानेर: निगम समेत 7 निकायों में अब क्या स्थिति; पढ़ें- कौन बना सकता है बोर्ड
बीकानेर: निगम समेत 7 निकायों में अब क्या स्थिति; पढ़ें- कौन बना सकता है बोर्ड
बीकानेर। जिले में कांग्रेस को बीकानेर नगर निगम श्रीडूंगरगढ़ और देशनोक में बढ़त मिली है। इसमें अकेले बीकानेर निगम में ही कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत है जबकि श्रीडूंगरगढ़ और देशनोक में कांग्रेस की सीटें भाजपा से ज्यादा है लेकिन स्पष्ट बहुमत नहीं है। ऐसे में यहां भाजपा जोड़तोड़ से अपना बोर्ड बनाने की कोशिश में है। श्रीडूंगरगढ़ में इस बार बना विकास मंच जिस पार्टी के साथ खड़ा होगा, उसका ही बोर्ड बनेगा। भाजपा को स्पष्ट रूप से लूणकरनसर और खाजूवाला दोनों में स्पष्ट बहुमत मिला है। लूणकरनसर में 35 में से 23 पार्षद जीते हैं। यहां भाजपा आसानी से अपना बोर्ड बना लेगी लेकिन खाजूवाला में 20 में 11 पार्षद जीते हैं। कांग्रेस के 8 और निर्दलीय 1 पार्षद है। भाजपा को अपने सभी पार्षदों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है, वहीं एक निर्दलीय भी उनके साथ रहना चाहिए।
नोखा में चुनाव नोखा विकास मंच ने लड़ा। कांग्रेस ने कोई उम्मीदवार ही खड़ा नहीं किया, जबकि भाजपा के 13 पार्षद जीते हैं। बीकानेर में कांग्रेस और भाजपा के कई सीनियर नेताओं की प्रतिष्ठा दाव पर है। कांग्रेस की ओर से नगर निगम में पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला मैदान संभाले हुए थे। नोखा में पूर्व विधायक बिहारी लाल बिश्नोई के नेतृत्व में पूरा चुनाव लड़ा गया लेकिन भाजपा यहां कमाल नहीं कर पाई। खाजूवाला में भाजपा विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल की प्रतिष्ठा बाल-बाल बच गई है क्योंकि बहुमत से सिर्फ एक सीट ज्यादा मिली है। अभी भी सभापति बनने तक उन्हें सक्रिय ही रहना पड़ेगा क्योंकि थोड़ी सी गड़बड़ कांग्रेस को लाभ दे सकती है। सबसे शानदार प्रदर्शन केबिनेट मंत्री सुमित गोदारा का रहा है। गोदारा के गृह क्षेत्र लूणकरनसर में भाजपा ने साफ बढ़त बनाकर साबित कर दिया कि वो बोर्ड बनाएंगे। वहीं नापासर में भी भाजपा बोर्ड बनाने की स्थिति में है। देशनोक में विधायक अंशुमान सिंह भाटी के नेतृत्व में जीत नहीं मिल सकी, लेकिन जोड़तोड़ से अध्यक्ष बनाने की कोशिश जारी है।
बीकानेर को चौथा निर्वाचित मेयर मिल जाएगा। इसके बाद ये भी साफ हो जाएगा कि कांग्रेस का बहुमत काम आया या भाजपा का सेंध लगाना। मतगणना के बाद से ही हर गली-मोहल्ले में मेयर चुनाव, निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में लाना, दोनों ही पार्टियों की अपनी-अपनी सेंधमारी करना और अपने पार्षद बचाने की जुगत लगाने की चर्चाएं चल रही हैं।
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