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गर्भवती गाय की कथित पिटाई से मौत के मामले में गिरफ्तार आरोपी की जमानत याचिका खारिज

rk
7 hours ago
गर्भवती गाय की कथित पिटाई से मौत के मामले में गिरफ्तार आरोपी की जमानत याचिका खारिज


गर्भवती गाय की कथित पिटाई से मौत के मामले में गिरफ्तार आरोपी की जमानत याचिका खारिज
 बीकानेर। जिले के सेशन कोर्ट ने गर्भवती गाय की कथित पिटाई से मौत के मामले में गिरफ्तार आरोपी सद्दाम हुसैन की जमानत याचिका खारिज कर दी है। सेशन न्यायाधीश अश्वनी विज ने माना कि मामले में महत्वपूर्ण गवाहों के बयान अभी दर्ज होने बाकी हैं और इस स्तर पर आरोपी को रिहा करने से गवाहों को डराने-धमकाने या प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह है पूरा मामला
परिवादी रूपसिंह ने 28 मई 2026 को बीछवाल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 23 मई की सुबह उसने अपनी तीन गायों और एक बछड़े को पेमासर स्थित खेत में चरने के लिए छोड़ा था। सुबह करीब साढ़े सात बजे उसे एक फोन आया, जिसमें फोन करने वाले ने अपना नाम सद्दाम हुसैन बताते हुए कहा कि उसकी गायें उसके खेत की सीमा में घुस आई हैं और उन्हें ले जाओ, नहीं तो वह उन्हें मार देगा।
परिवादी के अनुसार, शाम करीब पांच बजे पड़ोसी रेवंत सिंह का फोन आया कि सद्दाम और उसके परिवार के लोग उसकी गायों को लोहे की रॉड से पीट रहे हैं। जब वह मौके पर पहुंचा तो उसकी गर्भवती गाय मृत अवस्था में पड़ी मिली, जबकि अन्य गायों के शरीर पर भी चोटों के निशान थे। आरोप है कि आरोपियों ने भविष्य में अन्य गायों को भी मारने की धमकी दी।
पुलिस ने इस रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज कर आरोपी के खिलाफ धारा 325 भारतीय न्याय संहितातथा राजस्थान गोवंशीय पशु (वध का प्रतिषेध एवं अस्थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) नियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
आरोपी की ओर से कोर्ट में कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष का तर्क था कि आरोपी को 28 मई 2026 की सुबह ही एक अन्य मामले में केंद्रीय कारागृह बीकानेर से रिहा किया गया था और उसी दिन शाम को उसके खिलाफ यह मुकदमा दर्ज कर दिया गया। यह भी कहा गया कि शिकायतकर्ता उससे कृषि भूमि को लेकर विवाद रखता है और उसी कारण उसे फंसाया गया है।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह 8 जून 2026 से न्यायिक अभिरक्षा में है। साथ ही, मामले के विचारण में लंबा समय लगने की संभावना जताते हुए जमानत देने की मांग की गई।
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। मामले के महत्वपूर्ण गवाहों के बयान अभी दर्ज होने बाकी हैं और इस चरण में जमानत देने से गवाहों को प्रभावित करने या मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई पर प्रतिकूल असर पडऩे की आशंका है।
इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि फिलहाल आरोपी को जमानत पर रिहा करना न्यायोचित नहीं होगा और उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। राज्य और परिवादी की ओर से पैरवी क्रमश: लोक अभियोजक राधेश्याम सेवग और अधिवक्ता रेवंत सिंह राठौड़ व अभय सिंह ने की।

Sanskar
BC

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