Khulasa Online
TM Jewellers
e kart
Breaking
• बीकानेर: अचानक पैर फिसल कर गिरा व्यक्ति, टांके में डूबने से हुई मौत • बड़ी खबर: निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की मौत, 3 को सुरक्षित निकाला गया • सुप्रीम कोर्ट सख्त: खतरनाक कुत्तों को दे मौत का इंजेक्शन! अधिकारियों को दिए निर्देश • NEET पेपर लीक मामले में पुणे का केमेस्ट्री प्रोफेसर गिरफ्तार, CBI ने बताया मास्टरमाइंड • मौसम अपडेट: मानसून तय समय से पहले देगा दस्तक, जाने राजस्थान में कब होगी झमाझम बारिश • बीकानेर: अचानक पैर फिसल कर गिरा व्यक्ति, टांके में डूबने से हुई मौत • बड़ी खबर: निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की मौत, 3 को सुरक्षित निकाला गया • सुप्रीम कोर्ट सख्त: खतरनाक कुत्तों को दे मौत का इंजेक्शन! अधिकारियों को दिए निर्देश • NEET पेपर लीक मामले में पुणे का केमेस्ट्री प्रोफेसर गिरफ्तार, CBI ने बताया मास्टरमाइंड • मौसम अपडेट: मानसून तय समय से पहले देगा दस्तक, जाने राजस्थान में कब होगी झमाझम बारिश
jeevan raksha
Sambhav Hospital
Bharti

डॉ. बी.एल.स्वामी ने बताया कि हार्ट अटैक के क्योंं बढ़ रहे हैं मामले, इन चीजों पर लगाम अतिआवश्यक

Bansal
1 month ago
डॉ. बी.एल.स्वामी ने बताया कि हार्ट अटैक के क्योंं बढ़ रहे हैं मामले, इन चीजों पर लगाम अतिआवश्यक

खुलासा न्यूज,बीकानेर। लगातार हार्ट अटेक के बढ़ते मामलों को लेकर आज शहर के प्रतिष्ठित डॉ. बी.एल. स्वामी ने आमजन के साथ कुछ जरूरी जानकारी शेयर की। डॉ. स्वामी ने आमजन को हार्ट अटैक से बचने के लिए कुछ जरूरी टिप्स के बारे में जानकारी दी जिससे की बचाव किए जा सके। ये सभी बचाव छोटे-छोटे है लेकिन बेहद कारगर है। डॉ. स्वामी ने कहा कि जिम में वर्कआउट करते हुए या ऑफिस डेस्क पर काम करते हुए अचानक कार्डियक अरेस्ट का कारण है सीडेंट्री लाइफस्टाइल और अचानक लिया प्रेशर। कम उम्र में हार्ट अटैक की सबसे बड़ी वजह खराब लाइफस्टाइल और लगातार बना रहने वाला स्ट्रेस है।

 

सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. बी.एल. स्वामी ने आयुष्मान हार्ट केयर हॉस्पिटल  बीकानेर में आयोजित हार्ट हेल्थ केयर कैंप में शहरवासियों के साथ इसको लेकर जरूरी जानकारी दी। आयुष्मान हार्ट केयर हॉस्पिटल में आयोजित हार्ट हेल्थ केयर कैंप में डॉ. बी. एल. स्वामी की टीम ने कैंप में आए सभी लोगों का बीपी, ईसीजी और शुगर टेस्ट किया। डॉ. स्वामी ने हार्ट केयर को 6-एस फॉर्मूले के जरिए समझाया और इससे बचने के सॉल्यूशन भी बताए।


क्या है दिल का दुश्मन 6-एस
स्ट्रेस: क्रॉनिक स्ट्रेस दिल का सबसे बड़ा विलेन है। लगातार तनाव में रहने से सिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम 24&7 एक्टिव रहता है, जिससे हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ते हैं। इससे बचने के लिए योग, मेडिटेशन, म्यूजिक और अपनी हॉबीज को समय देना जरूरी है।


सिडेंटरी लाइफस्टाइल: सुबह से शाम तक स्क्रीन के सामने बैठे रहना और जीरो फिजिकल एक्टिविटी हार्ट के लिए साइलेंट किलर है। हफ्ते में कम से कम 5 दिन 30 मिनट की मॉडरेट एक्टिविटी (जॉगिंग, साइकलिंग या स्विमिंग) करें। लिफ्ट की जगह सीढिय़ों का इस्तेमाल करें।
स्लीप डेफिसिट: देर रात तक गैजेट्स स्क्रॉल करने और सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने से स्लीप साइकिल बिगड़ रही है। कम नींद सीधे तौर पर हाइपरटेंशन को दावत देती है। दिल को सेफ रखने के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की अनइंटरप्टेड नींद बेहद जरूरी है।


सॉल्ट: खाने में ऊपर से एक्स्ट्रा नमक छिड़कने की आदत, चिप्स, कुरकुरे, नमकीन और पैकेज्ड फूड आर्टरीज में प्रेशर बढ़ाते हैं। डाइट में सोडियम इनटेक को तुरंत कंट्रोल करने की जरूरत है। दिन में 5 ग्राम नमक का इनटेक पर्याप्त है।
शुगर: सॉफ्ट ड्रिंक्स और स्वीट्स से मिलने वाली एक्स्ट्रा शुगर मोटापा और डायबिटीज बढ़ाती है, जो आगे चलकर हार्ट ब्लॉकेज का कारण बनती है।


स्मोकिंग: स्मोकिंग आर्टरीज में इन्फ्लेमेशन और ब्लड क्लॉटिंग का खतरा कई गुना बढ़ा देती है। गुटखा, सिगरेट किसी भी रूप में निकोटीन दिल के लिए जानलेवा है।
युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के अन्य अहम कारण
डॉ. बी.एल. स्वामी ने बताया कि 6-एस के अलावा भी कुछ फैक्टर्स हैं जो कम उम्र में हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ाते हैं, और इन पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है:
फैमिली हिस्ट्री और जेनेटिक्स: अगर परिवार में माता-पिता या भाई-बहन को कम उम्र में हार्ट डिजीज हुई हो, तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे लोगों को 25-30 की उम्र से ही नियमित स्क्रीनिंग शुरू कर देनी चाहिए।
ओबेसिटी और पेट की चर्बी: सिर्फ वजन नहीं, बल्कि पेट के आसपास जमा फैट (विसरल फैट) इंसुलिन रेजिस्टेंस और हार्ट डिजीज का बड़ा रिस्क फैक्टर है।

 

अल्कोहल का ज्यादा सेवन: बिंज ड्रिंकिंग से ब्लड प्रेशर और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ते हैं, जो दिल पर सीधा असर डालते हैं।
एयर पॉल्यूशन: लगातार खराब हवा में रहने से आर्टरीज में सूजन बढ़ती है, जो लॉन्ग टर्म में हार्ट डिजीज का खतरा बढाती है।
नियमित हेल्थ स्क्रीनिंग की अनदेखी: 30 की उम्र के बाद हर साल लिपिड प्रोफाइल, ब्लड शुगर, बीपी और ईसीजी की जांच जरूर करानी चाहिए, भले ही कोई लक्षण न दिखें क्योंकि हार्ट डिजीज अक्सर बिना चेतावनी के सामने आती है।

BC

Join for Latest News

हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ

Share: