राजस्थान विधानसभा को फिर बम से उड़ाने की धमकी, तीसरी बार अलर्ट से हड़कंप
राजस्थान। राजस्थान विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी झूठी निकली। सुरक्षा एंजेंसियों के तीन घंटे के सर्च ऑपरेशन के बाद भी किसी तरह की कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। जिसके बाद पुलिस प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने राहत की सांस ली।
विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी के बीच नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और विधायक विधानसभा पहुंचे, जहां उनको विधानसभा में प्रवेश नहीं दिया गया। टीकाराम जूली ने सुरक्षा प्रहरियों को मजाकिया अंदाज में कहा कि अंदर कुत्ते बम ढूंढ रहे हैं, हम और कर्मचारी बाहर छाया ढूंढ रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने तंज करते हुए कहा कि अभी तक तो धमकी देने वाला ट्रेस भी नहीं हुआ है, पकड़ना तो दूर की बात है। उन्होंने कहा ऐसा मजाक बना हुआ है पूरे प्रदेश में आए दिन धमकी आ रही है, काम बाधित होता है। कमेटी की मीटिंग चल रही है, हमें विधानसभा में जाना था। मुझसे पहले जो विधायक आए थे उनको भी अंदर जाने से रोक दिया और स्टाफ को भी विधानसभा परिसर से बाहर निकाल दिया।
यह रोज का काम हो गया। दो सप्ताह में यह तीसरी धमकी है। अब तो लोग कह रहे हैं कि मोदी को वोट दोगे तो यही होगा। पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था चौपट है।
ई-मेल में क्या था खास?
धमकी भरे ई-मेल में डर पैदा करने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया—
विस्फोटक का जिक्र: ‘सिलिकॉन’ और ‘RDX’ जैसे खतरनाक पदार्थों का उल्लेख ,कर्मचारियों को बाहर रोका गया और अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया
सिर्फ विधानसभा नहीं, राजधानी भी निशाने पर
जयपुर में हाल के दिनों में कई अहम संस्थानों को ईमेल के जरिए धमकियां मिल चुकी हैं— राजस्थान हाई कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, SMS स्टेडियम को निशाना बनाने का दावा, निजी स्कूलों को भी डराने वाले ईमेल
हालांकि, अब तक की सभी धमकियां फर्जी (Hoax) साबित हुई हैं, लेकिन इससे पुलिस और प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।
बड़ा सवाल: आरोपी पकड़ से बाहर क्यों?
लगातार मिल रही धमकियों ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं— VPN और विदेशी सर्वर के जरिए ईमेल भेजे जाने से लोकेशन ट्रेस करना मुश्किल, यह किसी शरारती तत्व का काम है या बड़ी साजिश, इसकी जांच जारी, हर अलर्ट पर भारी सुरक्षा इंतजाम से समय और संसाधनों की बर्बादी
जयपुर पुलिस का कहना है कि हर धमकी को गंभीरता से लिया जाता है। भले ही अब तक कुछ संदिग्ध नहीं मिला हो, लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत सर्च ऑपरेशन जरूरी है। साइबर टीम ईमेल के हेडर और IP एड्रेस की जांच कर रही है और जरूरत पड़ने पर केंद्रीय एजेंसियों की मदद भी ली जा रही है।