Khulasa Online
Breaking
• राजस्थान के इन जिलों में 22–23–24 जनवरी को मावठ की संभावना, मौसम विभाग का नया अलर्ट जारी • आज का राशिफल : मिथुन, तुला और मकर राशि के लिए लाभदायक दिन, बुधादित्य योग का बना है आज शुभ संयोग • एसओजी ने बीकानेर में इस जगह दबिश देकर युवक को पकड़ा, ब्लूटूथ डिवाइस से नकल कर बना जूनियर क्लर्क, चीटिंग कर पत्नी ने भी पाई थी जॉब • राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बधिर बीकानेर की छात्र एवं छात्राओं ने किया शैक्षिक भ्रमण • ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जे का विरोध कर रहे इन 8 देशों पर लगाया इतने प्रतिशत टैरिफ, कहा- नहीं माने तो जून से टैरिफ और बढ़ेगा • राजस्थान के इन जिलों में 22–23–24 जनवरी को मावठ की संभावना, मौसम विभाग का नया अलर्ट जारी • आज का राशिफल : मिथुन, तुला और मकर राशि के लिए लाभदायक दिन, बुधादित्य योग का बना है आज शुभ संयोग • एसओजी ने बीकानेर में इस जगह दबिश देकर युवक को पकड़ा, ब्लूटूथ डिवाइस से नकल कर बना जूनियर क्लर्क, चीटिंग कर पत्नी ने भी पाई थी जॉब • राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बधिर बीकानेर की छात्र एवं छात्राओं ने किया शैक्षिक भ्रमण • ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जे का विरोध कर रहे इन 8 देशों पर लगाया इतने प्रतिशत टैरिफ, कहा- नहीं माने तो जून से टैरिफ और बढ़ेगा

‘अवैध खनन से ऐसा नुकसान जिसकी भरपाई असंभव’: अरावली मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, पुराना आदेश बरकरार

21 Jan 2026, 08:28 PM
‘अवैध खनन से ऐसा नुकसान जिसकी भरपाई असंभव’: अरावली मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, पुराना आदेश बरकरार

‘अवैध खनन से ऐसा नुकसान जिसकी भरपाई असंभव’: अरावली मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, पुराना आदेश बरकरार

जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि इससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए अदालत ने अरावली क्षेत्र में खनन और उससे जुड़े सभी पहलुओं की व्यापक जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का फैसला किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि अरावली जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अवैध खनन केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी गंभीर खतरा है।
अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और एमिकस क्यूरी के. परमेश्वर को निर्देश दिए हैं कि वे चार सप्ताह के भीतर खनन से संबंधित मामलों में विशेषज्ञता रखने वाले पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों के नाम सुझाएं, ताकि एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया जा सके। यह समिति सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और मार्गदर्शन में कार्य करेगी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि अरावली क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में अवैध खनन की गतिविधियां सामने आ रही हैं। इस पर राजस्थान सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने अदालत को आश्वस्त किया कि राज्य में किसी भी तरह का अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों और श्रेणियों की एक समान परिभाषा को लेकर 20 नवंबर को दिए गए अपने आदेश को फिलहाल स्थगित रखने का निर्णय भी बरकरार रखा है। अदालत ने इससे पहले कहा था कि नई परिभाषा में कुछ गंभीर अस्पष्टताएं हैं, जिनका समाधान किया जाना आवश्यक है।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैली अरावली पर्वतमाला में नई खनन लीज जारी करने पर रोक लगा दी थी। यह रोक विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक लागू की गई थी। यह निर्णय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया था, जिसका उद्देश्य दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक अरावली का संरक्षण करना है। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की जाने वाली विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही अरावली क्षेत्र में खनन और संरक्षण से जुड़े आगे के निर्णय लिए जाएंगे।

Share: