बड़ी खबर: बीकानेर सहित इन जिलों में वन विभाग ने पिछले 20 वर्षों से वन मंडलों में किए गए विकास कार्यों के भुगतानों की होगी जांच
बड़ी खबर: बीकानेर सहित इन जिलों में वन विभाग ने पिछले 20 वर्षों से वन मंडलों में किए गए विकास कार्यों के भुगतानों की होगी जांच
जयपुर। राज्य वन विभाग ने पिछले 20 वर्षों में अलवर, अजमेर और बीकानेर वन मंडलों में किए गए विकास कार्यों केलिए किए गए भुगतानों की जांच करने
के लिए जांच समितियों का गठन किया है। राज्य के वन मंत्री संजय शर्मा द्वारा 19 मई को जारी निर्देशों के बाद समितियों का गठन किया गया था,
जिसमें वन प्रभागों में विकास कार्यों के लिए किए गए भुगतानों की जांच का आदेश दिया गया था। शर्मा के ये निर्देश विराट नगर के विधायक कुलदीप धनखड़ की याचिका के बाद आए हैं, जिसमें उन्होंने अलवर और राज्य के अन्य मंडलों में विकास कार्यों और भुगतानों की व्यापक जांच की मांग की थी। धनखड़ ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के लिए नकद भुगतान पर रोक लगाने वाले 2004 के सरकारी आदेश के बावजूद, अलवर में बड़ी मात्रा में नकद लेनदेन जारी रहा, और दावा किया कि 2015-16 से 202324 तक चल रही जांच में 2004-05 से 2014-15 की अवधि को कुछ अधिकारियों को बचाने के लिए छोड़ दिया गया था। आधिकारिक पत्राचार से पता चलता है कि शर्मा ने सबसे पहले अलवर वन प्रभाग में 2004-05 से 2023-24 तक के विकास कार्यों के भुगतान की जांच का निर्देश दिया और आदेश दिया कि पहले चरण में प्रत्येक संभागीय मुयालय में एक प्रादेशिक वन प्रभाग को इसी तरह की जांच के लिए चुना जाए। प्रधान मुय वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) अरिजीत बनर्जी द्वारा बुधवार को जारी किए गए आदेश, 2004-05 और 2023-24 के बीच किए गए भुगतानों को कवर करते हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, समितियोंद्व को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। यह इस प्रक्रिया का पहला चरण है। आगामी चरणों में अतिरिक्त वन प्रभागों को शामिल किए जाने की उमीद है। अपने 19 मई के पत्र में शर्मा ने तीन दिनों के भीतर समिति के गठन और एक महीने के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट की मांग की थी। हालांकि, मंत्री कार्यालय से 5 जून को भेजे गए पत्र में कहा गया कि आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं, जिसके बाद विशेष सहायक अशोक कुमार योगी ने विभाग को आदेश जारी करने और मंत्री के अवलोकन के लिए प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अलवर वन प्रभाग में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण में शिकायत दर्ज कराने वाले पर्यावरण वकील तपेश्वर सिंह ने कहा, इस कदम से 2021-24 के दौरान अलवर प्रभाग में अग्रिम मृदा कार्यों के लिए कथित तौर पर लगभग 20 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की चल रही जांच कमजोर पड़ सकती है। दो जांच रिपोर्ट पहले ही प्रस्तुत की जा चुकी हैं, जबकि तीसरी अभी लंबित है। इन नए आदेशों से मामले से ध्यान भटकने और जवाबदेही में देरी होने का खतरा है।
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