Khulasa Online
Breaking
• बीकानेर: अचानक पैर फिसल कर गिरा व्यक्ति, टांके में डूबने से हुई मौत • बड़ी खबर: निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की मौत, 3 को सुरक्षित निकाला गया • सुप्रीम कोर्ट सख्त: खतरनाक कुत्तों को दे मौत का इंजेक्शन! अधिकारियों को दिए निर्देश • NEET पेपर लीक मामले में पुणे का केमेस्ट्री प्रोफेसर गिरफ्तार, CBI ने बताया मास्टरमाइंड • मौसम अपडेट: मानसून तय समय से पहले देगा दस्तक, जाने राजस्थान में कब होगी झमाझम बारिश • बीकानेर: अचानक पैर फिसल कर गिरा व्यक्ति, टांके में डूबने से हुई मौत • बड़ी खबर: निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की मौत, 3 को सुरक्षित निकाला गया • सुप्रीम कोर्ट सख्त: खतरनाक कुत्तों को दे मौत का इंजेक्शन! अधिकारियों को दिए निर्देश • NEET पेपर लीक मामले में पुणे का केमेस्ट्री प्रोफेसर गिरफ्तार, CBI ने बताया मास्टरमाइंड • मौसम अपडेट: मानसून तय समय से पहले देगा दस्तक, जाने राजस्थान में कब होगी झमाझम बारिश
jeevan raksha
Sambhav Hospital
Bharti

बीकानेर: आंशिक नहरबंदी में पूर्ण नहरबंदी के हालात, जाने कितना बचा है पानी

3 months ago
बीकानेर: आंशिक नहरबंदी में पूर्ण नहरबंदी के हालात, जाने कितना बचा है पानी

बीकानेर: आंशिक नहरबंदी में पूर्ण नहरबंदी के हालात, जाने कितना बचा है पानी 

बीकानेर। इंदिरा गांधी नहर परियोजना में आंशिक नहरबंदी के दौरान सप्लाई किया जाने वाला 2000 क्यूसेक पानी सोमवार तक नहीं छोड़ा जा सका। इससे आंशिक नहरबंदी के शुरू होते ही पूर्ण नहरबंदी जैसे हालात बन गए हैं। सरहिंद फीडर और इंदिरा गांधी नहर में एक कट लगाने के लिए हरिके से पानी बंद किया गया था। सोमवार रात तक पानी छोड़े जाने की संभावना है, लेकिन इसे नहर के अंतिम छोर तक पहुंचने में दो से तीन दिन लगेंगे। तब तक प्रदेश में पूर्ण नहरबंदी का समय नजदीक आ जाएगा। दरअसल, 27 मार्च से शुरू हुई 15 दिवसीय आंशिक नहरबंदी की शर्तों के तहत पेयजल के लिए निरंतर पानी मिलना था। यह पानी सरहिंद फीडर के रास्ते आता है, जहां पंजाब सीमा पर एक कट लगाया जाना था। सामान्यतः यह काम 24 घंटे में पूरा हो जाता है, लेकिन इस बार इसमें 6 दिन लग गए। इस देरी के कारण हरिके से आने वाला 2000 क्यूसेक पानी पूरी तरह बंद रहा। परिणाम स्वरूप, शहरों ने पूर्ण नहरबंदी के लिए जमा किए गए स्टॉक से ही काम चलाया।

अब संकट यह है कि जब पूर्ण नहरबंदी शुरू होगी, तब शहरों की प्यास कैसे बुझेगी? खासकर जोधपुर जैसे शहरों में, जहां जलाशय की क्षमता मात्र 8 दिन की है। पूरे नहरी क्षेत्र के 10 जिलों में सिर्फ सीकर और झुंझुनूं ही ऐसे जिले हैं, जहां 30 दिन का बैकअप है, बाकी 8 जिलों में एक दिन छोड़कर जलापूर्ति करना प्रशासन की मजबूरी बन गया है। ज्यादातर शहरों में पानी की क्षमता 15 से 20 दिन के बीच ही है। ऐसे में संकट काल में नहरों में पानी भरने की योजना नहर विभाग बना रहा है। बीकानेर शहर के लिए गजनेर लिफ्ट और कंवरसेन लिफ्ट में पानी भरा जाएगा। हालांकि ज्यादातर इस पानी को ग्रामीण क्षेत्र की स्कीमों में दे दिया जाता है। कुछ लोग चोरी भी कर लेते हैं। ऐसे में इस पानी पर शहर का हक कमजोर हो जाता है। शहर के दोनों विधायक चुप हो गए तो ग्रामीण क्षेत्र के विधायक इस पानी को खींचकर ले जाएंगे। बीछवाल और शोभासर जलाशय में 15 से 20 दिन का पानी शेष है। ये जलाशय 2022 की आबादी के अनुसार बने थे, जबकि 2026 में मांग काफी बढ़ चुकी है।

Join for Latest News

हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ

Share: