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सरकारी जमीन पर 40 साल से कब्जा करने वाले को कोर्ट से मिला झटका, फैसला रखा बरकरार

2 months ago
सरकारी जमीन पर 40 साल से कब्जा करने वाले को कोर्ट से मिला झटका, फैसला रखा बरकरार


सरकारी जमीन पर 40 साल से कब्जा करने वाले को कोर्ट से मिला झटका, फैसला रखा बरकरार 
 बीकानेर। सरकारी जमीन पर 40 साल से कब्जा होने का दावा करने वाले कानाराम को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। बीकानेर नगर निगम के खिलाफ दायर सिविल अपील को अपर जिला न्यायाधीश विनोद कुमार गुप्ता ने खारिज कर दिया।मामला कानाराम निवासी सालमनाथ धोरे, सुजानदेसर गंगाशहर से जुड़ा था। अपीलकर्ता ने दावा किया था कि वह पिछले करीब 40 वर्षों से विवादित भूखंड पर परिवार सहित रह रहा है और वर्ष 2008 में उसने यह जमीन खरीदी थी। उसने कोर्ट से मांग की थी कि नगर निगम उसे बेदखल न करे और कब्जे का नियमितीकरण किया जाए या फिर बदले में दूसरी जमीन दी जाए।अपीलकर्ता का कहना था कि राज्य सरकार ने वर्ष 2013 तक के कब्जों के नियमितीकरण को लेकर नीतियां बनाई थीं, लेकिन नगर निगम उन्हें लागू नहीं कर रहा। उसने यह भी आरोप लगाया कि निगम बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए तोडफ़ोड़ और बेदखली की कार्रवाई करना चाहता है।
वहीं नगर निगम ने कोर्ट में जवाब देते हुए कहा कि विवादित भूमि आवासीय योजना क्षेत्र में आती है, जहां किसी भी अवैध कब्जे का नियमितीकरण नहीं किया जा सकता। निगम ने  यह भी कहा कि कानाराम का मौके पर कोई वैध कब्जा या स्वामित्व साबित नहीं है और केवल इकरारनामे से सरकारी जमीन पर अधिकार नहीं मिल सकता।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि अपीलकर्ता अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेजी या मौखिक साक्ष्य पेश नहीं कर पाया। यहां तक कि उसने अपने कब्जे, मकान या स्वामित्व को साबित करने के लिए गवाह भी पेश नहीं किए। कोर्ट ने यह भी माना कि केवल वादपत्र में किए गए दावों के आधार पर कब्जा सिद्ध नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता यह साबित करने में असफल रहा कि उसका विवादित भूमि पर 40 वर्षों से कब्जा था या उसे नियमितीकरण का कोई कानूनी अधिकार प्राप्त है। इसी आधार पर कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। नगर निगम की ओर से पैरवी अधिवक्ता अरुण कुमार पुरोहित ने की।

 

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