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आरजीएचएस में फर्जीवाड़ा मामला : 1150 रुपए की एमआरआई 14,950 में करवा रहे थे डॉक्टर, एसओजी ने इन सस्पेंड डॉक्टरों पर दर्ज की एफआईआर

5 months ago
आरजीएचएस में फर्जीवाड़ा मामला : 1150 रुपए की एमआरआई 14,950 में करवा रहे थे डॉक्टर, एसओजी ने इन सस्पेंड डॉक्टरों पर दर्ज की एफआईआर

आरजीएचएस में फर्जीवाड़ा मामला : 1150 रुपए की एमआरआई 14,950 में करवा रहे थे डॉक्टर, एसओजी ने इन सस्पेंड डॉक्टरों पर दर्ज की एफआईआर

जयपुर। राजस्थान गर्वमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में फर्जीवाड़ा मामले में सस्पेंड डॉक्टर्स के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) में शुक्रवार को FIR दर्ज की है। एफआईआर में आरोप लगाया कि RGHS कार्डधारकों के नाम पर फेक बिल बनाकर करोड़ों रुपए का क्लेम उठाकर सरकारी खाता खाली किया गया।

एसओजी ने बताया- स्टेट हेल्थ एंश्योरेंस एजेंसी की दीपी गोयल की ओर से दी शिकायत पर FIR दर्ज की गई है। इसमें डॉ. विजय एंड बी लाल डायग्रोस्टिक सेंटर सीकर, डॉ. के.के.अग्रवाल (एसोसिएट प्रोफेसर, राजकीय श्रीकल्याण चिकित्सालय, सीकर), डॉ. मुकेश वर्मा (वरिष्ठ विशेषज्ञ, राजकीय श्रीकल्याण चिकित्सालय, सीकर), डॉ. गजराज सिंह (वरिष्ठ विशेषज्ञ, राजकीय श्रीकल्याण चिकित्सालय, सीकर), डॉ. राकेश चौधरी (वरिष्ठ विशेषज्ञ, राजकीय श्रीकल्याण चिकित्सालय, सीकर) और डॉ. सुनिल ढाका (एसोसिएट प्रोफेसर, राजकीय श्रीकल्याण चिकित्सालय, सीकर) के खिलाफ FIR हुई है।

गवरमेंट डॉक्टर्स ने प्राइवेट डायग्रोस्टिक सेंटर से मिलीभगत कर फेक बिल और पर्चे जारी कर RGHS योजना में करोड़ों रुपए की सरकारी खजाने में चपत लगाई।

एजेंसी की ओर से 350 पेज की जांच रिपोर्ट बनाकर एसओजी को भेजी गई है। जांच में बताया कि RGHS कार्डधारकों के नाम पर सरकारी खजाने में चपत लगाने के लिए पूरी धांधली की गई। एजेंसी की जांच में सामने आया कि RGHS कार्डधारकों (लाभार्थी) कभी सीकर में किसी भी डॉक्टर और डाइग्रेस्टिक सेंटर पर परामर्श के लिए गया ही नहीं था। उसके बाद भी आरोपी डॉक्टर्स की ओर से कार्डधारकों का OPD पर्च बना दिया। उन पर्चों पर आरोपी डाइग्रोस्टिक सेंटर की ओर से 5 से अधिक MRI जांच की गई। अनेकों मामलो में लाभार्थियों की डॉक्टर की ओर से वास्तविक रूप में देखे बिना ही ओपीडी पर्चे जनरेट कर महंगी और अत्यधिक अनावश्यक MRI जांच लिखी गई। आरोपी डॉक्टर्स की ओर से किसी प्रकार का उपचार किए बिना ही सीधे डॉ. विजय एंड बी लाल डायग्रोस्टिक सेंटर सीकर के लिए रेफर किया गया। मरीजों की ओर से बताई गई शिकायतों और लिखी गई जांचों के बीच स्पष्ट विसंगति पाई गई।

कार्डधारकों को नहीं दिए बिल-रिपोर्ट

जहां MRI (Spine Screening Package) कम लागत पर 1150 रुपए उपलब्ध था। वहां वित्तीय लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से अलग-अलग स्पाइन MRI (Cervical, Dorsal, Lumbar आदि) 14,950 में लिखी गई। दोनों घुटनों के जॉइंट की MRI 2444 रुपए और दोनों कंधों की MRI का पैकेज 3163 कम लागत पर उपलब्ध था। वित्तीय लाभ के लिए अलग-अलग दोनों घुटनों के 4 हजार 888 और दोनों कंधों के 4 हजार 600 रुपए के अलग-अलग पैकेज बुक किए गए।

कई मामलो में लाभार्थियों को कराई गई अतिरिक्त जांचों की जानकारी तक नहीं दी गई। नहीं उसको किसी प्रकार का बिल और रिपोर्ट नहीं दी गई। लेकिन उक्त अनावश्यक जांचों का राज्य सरकार से रकम क्लेम की गई।

पिछले दिनों किया था सस्पेंड

RGHS की परियोजना निदेशक डॉ. निधि पटेल ने मेडिकल हेल्थ डिपार्टमेंट को अनुशंसा की थी। जांच में इन डॉक्टर्स के खिलाफ प्राइवेट डायग्नोसिस सेंटर को फायदा पहुंचाने के लिए की गई गड़बड़ी का जिक्र किया। पिछले हफ्ते सरकार की ओर से कार्रवाई करते हुए इन सभी सरकारी डॉक्टर्स को सस्पेंड कर दिया गया था।

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